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हर चीज़, हर परिस्थिति को सहर्ष कैसे स्वीकारते हैं? 12वीं में मैंने मुक्तिबोध जी की वह कविता 'सहर्ष स्वीकारा है' पढ़ी तो कविता की प्रत्येक प...